मैं अपने बारे में अपने दोस्तों से कम जानता हूँ इसलिए अपने बारे में उन्हीं की राय को सही समझता हूँ, और इस तरह खुश रहता हूँ। शायरी, कविता आदि पहली पसन्द, मगर गद्य-लेखन का अनुभव न होने से, प्रथम प्रयास ब्लॉगरी का वस्तुत: यही है। गुरु बनकर सिखाया श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय जी ने इस साइट के बारे में, तो बस, शुरू हो गई इलाहाबादी की बतकही…